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उज्जैन संभाग बन रहा देश का नया फूड प्रोसेसिंग पावरहाउस, 7300 करोड़ से ज्यादा निवेश से बदली औद्योगिक तस्वीर
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन संभाग अब केवल धार्मिक और कृषि पहचान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से देश के प्रमुख फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों और उद्योगों को अनुकूल वातावरण देने की रणनीति का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।
औद्योगिक आंकड़ों के अनुसार, उज्जैन संभाग में केवल फूड प्रोसेसिंग और एग्रो आधारित उद्योगों के क्षेत्र में ही लगभग 7300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। इसके साथ ही 5800 से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी तैयार हुए हैं।
कृषि प्रधान क्षेत्र से एग्रो इंडस्ट्रियल बेल्ट बनने की ओर बढ़ता संभाग
अब तक उज्जैन संभाग की पहचान मुख्य रूप से कृषि उत्पादन के लिए रही है, लेकिन बीते कुछ समय में यहां कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार तेजी से हुआ है। सोयाबीन, आलू, मसाले, दाल और डेयरी उत्पादों पर आधारित उद्योगों की श्रृंखला विकसित होने लगी है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव यह हुआ है कि अब खेती से लेकर प्रोसेसिंग और फिर मार्केटिंग तक एक व्यवस्थित वैल्यू चेन तैयार हो रही है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा है।
उज्जैन संभाग के सातों जिले— उज्जैन, देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर और आगर-मालवा— इस औद्योगिक विस्तार का हिस्सा बन रहे हैं। इससे क्षेत्रीय संतुलित विकास को भी गति मिल रही है।
किसानों को मिल रहा सीधा फायदा
फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के बढ़ने से किसानों की उपज की स्थानीय मांग में तेजी आई है। सोयाबीन, आलू, दाल और मसालों की खरीद अब बड़े स्तर पर सीधे उद्योगों के लिए हो रही है।
कई कंपनियां किसानों से सीधे खरीद कर रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और किसानों को बाजार से बेहतर जुड़ाव मिला है। इससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बड़ी कंपनियों ने बढ़ाई उज्जैन संभाग की औद्योगिक साख
फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में देश और दुनिया की कई प्रतिष्ठित कंपनियों की एंट्री ने उज्जैन संभाग को नई औद्योगिक पहचान दिलाई है।
संभाग में निवेश करने वाली प्रमुख कंपनियों में पेप्सिको इंडिया होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड, मैकेन फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एआरएफएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, अमिटेक्स एग्रो प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड, विप्पी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आदानी विल्मर लिमिटेड, सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन लिमिटेड, सफल फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, महाशियन दी हट्टी प्राइवेट लिमिटेड (MDH), रेल्सस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और इस्कॉन बालाजी फूड प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इन कंपनियों की मौजूदगी ने क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई औद्योगिक पहचान दिलाई है।
निर्यात और खाद्य सुरक्षा को भी मिलेगा लाभ
फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के विस्तार का प्रभाव केवल उद्योग तक सीमित नहीं है। इससे स्वदेशी खाद्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ रहा है और निर्यात को भी मजबूती मिल रही है।
राज्य के लिए यह निवेश सकल घरेलू उत्पाद में योगदान देने वाला महत्वपूर्ण कारक बन रहा है। साथ ही खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिल रही है।
उज्जैन संभाग अब कृषि और उद्योग के संतुलित विकास मॉडल के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।
रोजगार के नए अवसरों से घट रहा पलायन
फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के कारण रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है। लगभग 5800 प्रत्यक्ष रोजगार के अलावा परिवहन, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में हजारों अप्रत्यक्ष अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
इसका फायदा स्थानीय युवाओं को मिल रहा है, जिन्हें अब अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिलने लगा है। इससे पलायन में कमी और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।
लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र को भी मिल रही गति
फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के विस्तार का असर अन्य क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है। लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ी हैं।
औद्योगिक निवेश के साथ पूरे संभाग में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ रहा है और जीवन स्तर में भी बदलाव दिखाई देने लगा है।
एमपीआईडीसी ने बताया- उज्जैन बनेगा बड़ा फूड प्रोसेसिंग सेंटर
एमपीआईडीसी उज्जैन के कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन संभाग तेजी से “फूड प्रोसेसिंग हब” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह क्षेत्र न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रमुख कंपनियां और उनका निवेश
मैकेन फूड्स इंडिया प्रा. लि.
- कार्य : फ्रेंच फ्राइज उत्पादन
- निवेश : ₹3800 करोड़
- रोजगार : 591
पेप्सिको इंडिया होल्डिंग प्रा. लि.
- कार्य : फ्लेवर एवं बेवरेज उत्पादन
- निवेश : ₹1225 करोड़
- रोजगार : 500
महाशियन दी हट्टी प्रा. लि. (MDH)
- कार्य : मसाला निर्माण
- निवेश : ₹355 करोड़
- रोजगार : 300
आरपीएसपीएल प्रा. लि.
- कार्य : व्हिप टॉपिंग एवं क्रीम उत्पादन
- निवेश : ₹230 करोड़
- रोजगार : 200
विप्पी इंडस्ट्रीज लिमिटेड
- कार्य : सोयाबीन ऑयल उत्पादन
- निवेश : ₹210 करोड़
- रोजगार : 750
अमिटेक्स एग्रो प्रोडक्ट प्रा. लि.
- कार्य : प्रोसेस्ड फूड निर्माण
- निवेश : ₹200 करोड़
- रोजगार : 400
सफल फूड्स प्रा. लि.
- कार्य : दाल मिल एवं ऑयल उत्पादन
- निवेश : ₹158 करोड़
- रोजगार : 300
एआरएफएम फूड्स प्रा. लि.
- कार्य : एग्रो फूड पार्क
- निवेश : ₹150 करोड़
- रोजगार : 500
हरिओम रिफाइनरी
- कार्य : सोया रिफाइनरी
- निवेश : ₹133 करोड़
- रोजगार : 100
सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन लि.
- कार्य : प्रोटीन एवं एग्रो उत्पाद
- निवेश : ₹118 करोड़
- रोजगार : 407
आदानी विल्मर लि. (नीमच)
- कार्य : सोया एवं वनस्पति तेल उत्पादन
- निवेश : ₹112 करोड़
- रोजगार : 350
रेल्सस इंडिया प्रा. लि.
- कार्य : फूड इंग्रीडिएंट निर्माण
- निवेश : ₹97 करोड़
- रोजगार : 185
एवीआई एग्री बिजनेस प्रा. लि.
- कार्य : सोया प्रोसेसिंग
- निवेश : ₹93 करोड़
- रोजगार : 341
इस्कॉन बालाजी फूड प्रा. लि.
- कार्य : पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन
- निवेश : ₹93 करोड़
- रोजगार : 383
कृति न्यूट्रिशन लि.
- कार्य : सोया उत्पाद निर्माण
- निवेश : ₹59 करोड़
- रोजगार : 180
मित्तल सोया प्रोटीन प्रा. लि.
- कार्य : सोया उत्पाद निर्माण
- निवेश : ₹54 करोड़
- रोजगार : 86
पंचमहल दुग्ध उत्पादक संघ
- कार्य : डेयरी उत्पाद निर्माण
- निवेश : ₹44 करोड़
- रोजगार : 336
उज्जैन संभाग में तेजी से बढ़ता यह औद्योगिक निवेश अब प्रदेश की आर्थिक संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। कृषि, उद्योग और रोजगार को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।